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Friday, 28 December 2012

काश !!



ये जो जज़्बात हे इन्हें ,,
शब्द बयाँ कर नहीं सकते ...
हर बात को कहा जाये,, ये ज़रूरी हे
बिन कहे क्यों इन्हें समझ नहीं सकते ??

ऐसे तो लिख दिया यहाँ
जो कभी किसी से कहा नहीं ...
पर उन बातो का क्या करू
जिन्हें बयां भी नहीं कर सकते ??

हे तो कई दोस्त ऐसे 
जो हे हमराज़ मेरे ...लेकिन कोई बतला दे मुझे
हो जो कोई उपाय अगर
आखिर क्यों वो दोस्त इन जज़बातो को पहचान नहीं सकते  ??

कितना अच्छा होता
जो इनकी भी ज़ुबान होती ...
क्यूंकि सच तो यही हे
कुछ बाते किसी को समझा नहीं सकते !!

~नूपुर~







15 comments:

  1. कश्मकश...
    कहा भी नहीं जाता, चुप रहा भी नहीं जाता
    सुंदर अभिव्यक्ति ....

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  2. good one .. shayad hum-me hi kuch kami ho, ki dost samajh nahin pa rahe hain ..

    Bikram's

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    Replies
    1. The problem is that... I'm unable to express....

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  3. beautiful poem!

    wishing you a very happy and prosperous new year!

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  4. wow.. really so true, interesting poem
    good one , keep blogging (^-^)....
    Tips Via Blogging

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  5. Nyc poem smtym it is better to write when we fail to share our feelings with frnds.... Keep writing.... Nd wish u happy new year...

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  6. सार्थक सन्देश...
    यह वर्ष सभी के लिए मंगलमय हो इसी कामना के साथ..आपको सहपरिवार नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ...!!!

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  7. नुपुर ; वाह जी वाह क्या बात है....! बहुत सुन्दर----

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