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Friday, 30 November 2012

// पुकार //


दूर देश से,
आखों में ..... 
तू बिन हिचके आ जाना //

राग,
स्वप्न,
सब बाँहों में .....
तू साथ लिए आ जाना //

जब चन्दा रौशनी फेलायेगा,
संग ख़ामोशी भी आएगी ..              
ले कर आँचल तेरा उस मौसम में ,
तू बिन पूकारे आ जाना //

जब तक तू न आती हे,
देखते हे सब रस्ता तेरा  ..
एसे तो कहते हे नींद तुझे, 
पर तू रातों का चैन बन कर आ जाना//

बात अलग सी थी जब, तुझे माँ पुकार लगाती थी,
और झासा देकर मुझको लोरियां गाया करती थी ..
माना माँ जेसी बात नहीं मुझमे ,
पर तू नादान समझकर आ जाना //

दूर देश से,
आखों में ..
तू बिन हिचके आ जाना //






~नूपुर ~

22 comments:

  1. चेहरे पर मुस्कान लाती बहुत ही प्यारी कविता।


    सादर

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  2. so sweet.. the words will melt her, and she will come soon. nice poem
    :)

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  3. I love your Hindi poems ... they are so sweet :-)

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  4. awwwwwwwww
    mush mush and romantic i will say

    may that person come sooon all the way

    Bikram's

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  5. कल 02/12/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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    Replies
    1. Ek baar fir se....Dhanyawad Yashwant ji :)

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  6. बहुत गहन भाव लिए सुन्दर रचना है |
    आशा

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  7. बहुत ही सुन्दर रचना...
    :-)

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  8. beautiful hindi poem Noopur.. keep writing dear..

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  9. सुन्दर रचना,
    बधाई

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  10. wonderful wrk as olws :) god bless u :)

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  11. Noopur ji.. Bahut bdita likhi h aapne..!! Nd thanks fr visiting my blog... Vry soon there is new post..!!!

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