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Wednesday, 21 November 2012

अंत भला तो सब भला।।।

क्या खोया क्या पाया
राह चलते हर वक़्त खुद को तनहा पाया

यूँ तो हे दिलासे बोहोत देने वाले
पर कितने हे इनमे अंत तक साथ चलने वाले ??

सीख ... सबक ... सब याद हे मुझे 
वही सब खीच लाते हे मुझे अक्सर
वरना तो फ़िसूल ही हे सब
अपना .... पराया .....
क्या रखा हे इन सब में ??

जाते वक़्त तो कुछ नहीं रहता हे साथ
फिर क्या करना मोह और घृणा रख कर
दो दिन याद रख कर सब भूल जायेंगे 
फिर क्यू करना ये तेरा-मेरा ??

कर सकू तो कुछ एसा कर जाऊ 
जो याद रखे हर कोई मुझे 
वरना  तो फिसूल ही हे सब
रिश्ते .... नाते .....

वो कहते हे ना ... अंत भला तो सब भला।।।

24 comments:

  1. Right ... all is well that ends well :-)

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  2. some great thoughts beautifully told..

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  3. very true Alls well that ends well ..

    Take care

    Bikram's

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  4. first, let the end come :P
    then everything will be OK :)

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  5. सुंदर भाव हैं नुपुर जी

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  6. Hmm bt evry ending is nt good..!!:) u write well hindi poem keep it up..

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