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Wednesday, 12 September 2012

एक सोच



अक्सर लोगो को कहते सुना हे की उसने जो किया गलत था और वही दूसरी ही और कुछ लोग कहते हे - उसकी जगह खुद को रख कर देखो तब शायद उसे समझ पाओगे//

हर वक़्त होड़ सी लगी रहती हे .... खुद से ज़्यादा औरो को चिंता रहती हे हमारी। कुछ होने की देर हे बस हमारी जिंदगियो में और लोग अपने कम में लग जाते हे ...

अक्सर हमारा एक फैसला दो गुटों में बट जाता हे .... सही और गलत के बीच ///

हम पर क्या बीत रही हे ये कोई नहीं जनता पर लोग तो अपने काम में इतने व्यस्त रहते हे ...हमारे हर फैसले पर टिपण्णी जो करनी होती हे...

पर में ये समझ नहीं पाती की ,,क्या सही हे और क्या गलत इसका फैसला कोई और केसे कर सकता हे ??

कई बार हम खुद फैसला नहीं कर पाते सही और गलत के बीच //
अक्सर एक फैसले में हमारी माँ हमारे साथ होती हे और वही दूसरी और हमारे घर के और सदस्यों को वो फैसला गलत दिखाई देता हे //

फिर केसे कोई कह देता हे सही या गलत??
यह सब हमारी सोच पर निर्भर करता हे ....हम सोचते रहते हे - कितना अच्छा होता की हमारे निर्णय हम बिना किसी दबाव ,, बिना किसी उलझन के ले पाते .... पर एसा हो कहा पाता हे ??

एक फेसले के पीछे हम जाने कितनी बार सोचते हे ,, फिर भी फेसला लेने के बाद उस पर हमारी सहमति नहीं होती ....

लेकिन यह भी सच हे की जेसा हम सोचते हे वेसे ही हमारे जेसे दूसरे और भी हे ....हमने भी तो जाने अनजाने में किसी के फेसले में अड़चन डाली होगी ... हो सकता हे सामने वाला कह पाया हो और में समझ भी नहीं पाई ??

जब तक में खुद नहीं सुधरती केसे किसी और से उम्मीद रखु ??
इसलिए आज खुद से एक वादा करती हू की जानते हुए किसी के फेसले में बाधा नहीं डालूंगी।।।

हो सकता हे इस से मेरी ज़िन्दगी में कोई अंतर पड़े ,, लेकिन इस बात की ख़ुशी रहेगी की मेने किसी और को समझा ...
अपनी ज़िन्दगी में जो बदलाव में दुसरो से चाहती हु ,, क्यू उसकी शुरुवात मुझी से हो ??

वेसे भी सही या गलत का चुनाव में कर भी केसे सकती हु ?? ये हक किसने दिया मुझे ??
एक बच्चा जो दुनिया की नजरो में अपंग हे , लाचार हे , बीमार हे ... वही बच्चा उसकी माँ की प्रिय संतान ... तो कोन सही हे ?? एक माँ?? या फिर ये दुनिया ??

यह सब सोच का खेल हे,, बेहतर हे हम अगर अपनी सोच बड़ी रखे और विचारो को सुन्दर ... दुसरो पर टिपण्णी करने के बजाये हम अगर उतना ही समय खुद पर सोचे तो शायद ज़िन्दगी की परिभाषा ही बदल जायगी।।

मेने तो प्रण कर लिया ...आज से ....अभी से ....
क्या आप भी मेरा साथ देंगे???

~नूपुर~

14 comments:

  1. nice thought noopur...
    everyone will follow u with pleasure.

    bless u.
    anu

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  2. You have summed it up so well !!!

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  3. अपनी टांग नहीं अडानी चाहिए दूसरों के फैंसले में ... पर कभी कभी सुझाव जरूर लेते देते रहना चाहए ... क्योंकि निर्णय बहुत सी बातों से प्रभावित होते अहिं और गलती से भी गलत निर्णय लेना ठीक नहीं होता ...

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  4. @expression
    I hope the same anu di...

    @Green Speck
    my pleasure

    @S.N SHUKLA
    Thank you...

    @दिगम्बर नासवा
    me apki baat se sehmat hu...lekin jo baat me kehna chahti hu shyad aap samjhe nahi....

    @यशवन्त माथुर
    Thanx...

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  5. very nice written noopur i appreciate you....

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  6. Thank you for the kind words on my blog. :)

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  7. I read today ur blog many post it is nyc thinking.. I feel gd aftr read it... Bcoz in these day i also.. Feel this situation with me.. Plz when hav tym visit my blog.. Thanx

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    1. Happy that it touched your heart....and you too have a great blog.... :)

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