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Tuesday, 5 June 2012

कितना मुश्किल है!!!


क़दम क़दम गमगा  रहा है मेरा,,
आँसू सवाल उठा रहा है मेरा. . . .!!!
यह धड़कनें है की ठहरती नहीं,,
आईना भी अब नजर चुरा रहा है मेरा. . . .!!!

पल पल सपना टूट रहा है मेरा,,
कोई मजाक बना रहा है मेरा. . . . !!!
कितनी शिकायत है हरेक को मुझसे,,
वक़्त भी अब साथ छोड़ चला है मेरा. . . .!!!

क्षण क्षण बदला जा रहा है मेरा,,
खुद पर यक़ीन खत्म होता जा रहा है मेरा. . . .!!!
कुछ गुनाह होगा ना मेरा,,
मुसकुराना भी अब कठिन होता जा  रहा है मेरा. . . .!!!

कहीं बातें बदती नहीं,,
सही रह कर भी सुनना कितना मुश्किल है!!! :( :(

अब समझ आया मुझे..
ज़िंदगी में ज़िदा रहना कितना मुश्किल है!!! :( :(


~नूपुर~




15 comments:

  1. कुछ अपने अगर साथ हो तो ज़िन्दगी जीना कोई बड़ी बात नहीं .... :))

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  2. @jayesh
    ha bilkul sahi....... :) :)

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  3. कल 18/05/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति में) पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  4. Meri link ko shamil karne k liye dhanyawad yashwant ji... :)

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  5. jindagi jeena mushkil to hai, par jeeena to pagega hi:)

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  6. @Mukesh kumar sinha ji...
    Dhanyawad... :)

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  7. अब समझ आया मुझे..
    ज़िंदगी में ज़िदा रहना कितना मुश्किल है!!!

    मन को छूते हुए रचना के भाव ...

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  8. @सदा
    Mere man ki bhawnao ko samajhne k liye...dhanyawad :)

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  9. इतनी निराशा भी अच्छी नहीं क्यूंकि ज़िंदगी जीना मुश्किल ज़रूर है मगर नामुमकिन नहीं....

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  10. बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........

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  11. @sushma 'आहुति'
    Thank you :)

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  12. @pallavi
    Ha janti hu...par kabhi kabhi bus kalam chal jati h...aur likh deti h wo sab kuch jo dil me rehta h :)

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  13. ज़िन्दगी में जिंदा रहना... हाँ, मुश्किल तो है..
    मगर आप जैसा ज़िंदादिल इंसान भला ये क्यूँ कहे कि उसके कदम डगमगा रहे हैं! होने दो जो होना है.. हम चलेंगे अपने रस्ते.. और पहुंचेंगे अपनी मंजिल.. जीना इसी का तो नाम है.. :)
    वैसे कविता बहुत ही अच्छी और लयबद्ध है.. बहुत सुन्दर!!

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